गर्भवती बीवी और अस्पताल से लौटी बेटी को अकेला छोड़ ड्यूटी पर तैनात है यह पुलिसकर्मी

उत्तराखंड नोकरी

देहरादून. कहते हैं कि कठिन समय इंसान के चरित्र की परीक्षा लेता है. यह बात आज अगर एक समूह यानी कि उत्तराखंड पुलिस के बारे में कही जाए तो यह कहना पड़ेगा कि एक फ़ोर्स के रूप में ‘मित्र पुलिस’ इस परीक्षा में फ़्लाइंग कलर्स के साथ पास हुई है. और इसकी वजह हैं एसआई आशीष रावत जैसे इसके सिपाही. उत्तराखंड में सरकार ने केंद्र के लॉकडाउन के ऐलान से पहले 23 मार्च को ही लॉकडाउन कर दिया था, तभी से आशीष रावत ड्यूटी पर तैनात हैं. घर में चार महीने की गर्भवती बीवी के साथ 5 साल की बेटी है, जो लॉकडाउन से एक दिन पहले ही अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर लौटी थी.

मित्र पुलिस

उत्तराखंड पुलिस का सूत्र वाक्य है, ‘मित्र पुलिस’. लॉकडाउन से पहले अगर किसी को इस पर विश्वास नहीं रहा होगा तो अब हो गया होगा. देहरादून ही नहीं राज्य भर से पुलिस के लोगों की मदद करने की ख़बरें आ रही हैं. पुलिस भूखों को खाना खिला रही है, बीमारों तक दवा पहुंचा रही है, सैनिटाइज़र-मास्क बांट रही है और चौबीस घंटे ड्यूटी पर तैनात है ताकि कोरोना भी न फैले और किसी को तकलीफ़ भी न हो.

और पुलिसकर्मी यह सब मुस्कुराकर कर रह हैं. अपनी ज़रूरतों को, तकलीफ़ों को जैसे उन्होंने पोटली में बांधकर कहीं छुपा दिया है.

si aashish rawat & family, corona warrior, परिवार के साथ छुट्टियां मनाते आशीष रावत.

परिवार के साथ छुट्टियां मनाते आशीष रावत.

‘सब निबाह रहे हैं अपना कर्तव्य’

आज बात मित्र पुलिस के ऐसे ही कोरोना योद्धा एसआई आशीष रावत की. आशीष रावत देहरादून की बाईपास चौकी पर तैनात हैं. 23 मार्च को जब प्रदेश में लॉकडाउन का ऐलान हुआ वह यहीं चौकी पर ही सो रहे हैं और ऐसा इसलिए क्योंकि यहां चंद घंटों की कच्ची-पक्की नींद के दौरान भी वह ज़रूरत के समय उपलब्ध होते हैं.

घर पर आशीष की पांच साल की बेटी मीमांशा है और बीवी, सोनम रावत हैं.  सोनम चार महीने की प्रेग्नेंट है और लॉकडाउन शुरु होने से ठीक पहले पांच साल की मीमांसा का गले में सिस्ट के लिए एक ऑपरेशन हुआ था और 21 तारीख को ही वह घर लौटी थी. ज़ाहिर है कि मां-बेटी को अभी पति और पिता की जितनी ज़रूरत थी उतनी पहले नहीं रही.

23 तारीख को लॉकडाउन के ऐलान के बाद आशीष घर तो गए हैं लेकिन दिन में ही थोड़ी देर के लिए, ज़रूरी सामान लेने के लिए. नाज़ुक समय में बीवी और बेटी किसी तरह के इंफ़ेक्शन की आशंका से दूर रहें इसलिए भी वह घर नहीं जा रहे हैं.

तो ऐसी स्थिति में ड्यूटी मुश्किल लग रही है क्या?

si aashish rawat family, corona warrior, एसआई आशीष रावत की पत्नी सोनम रावत और बेटी मीमांसा.

एसआई आशीष रावत की पत्नी सोनम रावत और बेटी मीमांसा.

आशीष मुस्कुराकर कहते हैं, ” पुलिस की ड्यूटी तो वैसे भी 24 घंटे की होती है, हमेशा तैयार रहना होता है, फिर सभी तो कर रहे हैं अपना-अपना काम, अपनी-अपनी ड्यूटी सभी निबाह रहे हैं. “

कोरोना के साथी भी हैं प्रदेश मेंं

नहीं आशीष जी, सब नहीं. शुक्रवार शाम को लॉकडाउन का उल्लंघन करने पर प्रदेश में 65 केस दर्ज कर 279 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. ये वह लोग हैं जो अपनी जान को खतरे में डालकर कोरोना वायरस को रोकने के लिए तैनात फ़्रंटलाइन कोरोना वॉरियर्स (पुलिस, मेडिकल स्टाफ़, सफ़ाईकर्मी) की कोशिशों को बेकार करने में लगे हुए हैं,. प्रदेश में अभी तक 1696 केस दर्ज कर ऐसे 6853 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है.

इसीलिए rudranews.com आशीष रावत जैसे कोरोना योद्धाओं को सम्मान करने के लिए विशेष अभियान चला रहा है.

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