मोबाइल वाले बच्चे तो कर रहे ऑनलाइन पढ़ाई, बाकी छात्रों का क्या होगा ?

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क्लास में छात्र 25 और ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं केवल 10 फीसदी। सरकारी स्कूलों में बेसिक-जूनियर स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई का यही हाल है।

10 से 15 प्रतिशत छात्र ही शिक्षक के साथ व्हाट्सएप पर जुड़कर पढ़ाई कर पा रहे हैं। चिंता इस बात की है कि कोरोना महामारी के कारण जारी स्कूल बंदी से सरकारी स्कूलों के छात्र पढ़ाई में पिछड़ न जाएं।

शिक्षा विभाग ऑनलाइन पढ़ाई से छूटे हुए छात्रों को लेकर अभी कोई ठोस फॉर्मूला नहीं तलाश पाया है। 20 जुलाई को एससीईआरटी के विशेषज्ञ बीईओ, उप शिक्षाधिकारियों के साथ ऑनलाइन बैठक  में रास्ता तलाशेंगे। 

निदेशक-एआरटी सीमा जौनसारी ने इस बाबत निर्देश भी जारी कर दिए हैं। उनके अनुसार, 20 से 23 जुलाई तक बीईओ, उपशिक्षाधिकारियों की वर्चुअल वर्कशॉप होगी।

इसमें इस बिंदु पर भी मंथन किया जाएगा। राज्य में सरकारी स्कूल 14 मार्च के बाद से बंद हैं। शैक्षिक संस्थानों में यह बंदी 31 जुलाई तक जारी रहेगी।

कोरोना की समीक्षा के बाद स्कूल खोलने पर 31 जुलाई के बाद ही फैसला लिया जाएगा। स्कूल बंदी से ज्यादा नुकसान में सरकारी स्कूलों के वो छात्र हैं, जो बेसिक-जूनियर कक्षाओं में पढ़ रहे हैं।

पारिवारिक पृष्ठभूमि मजबूत न होने की वजह से स्मार्टफोन, इंटरनेट इन बच्चों के लिए परीक्षा सरीखा ही है। वर्तमान में 6.89 लाख छात्र-छात्राएं बेसिक, जूनियर कक्षाओं में पंजीकृत हैं।

माली का काम करने वाले हरिपाल बताते हैं कि पहले टच वाला स्मार्टफोन नहीं था। ऐसे में बच्ची पढ़ाई के लिए शिक्षक से जुड़ नहीं पाई। आठ-नौ हजार रुपये कम थोड़े ही होते हैं।मेरे स्कूल में शिक्षक व्हाटसएप ग्रुप के जरिये छात्रों से जुड़े हैं। बामुश्किल 10 से 15 फीसदी छात्र ही इस माध्यम से गंभीरता से पढ़ाई कर रह रहे हैं। मोबाइल फोन, नेट के अभाव के कारण कई बच्चे नहीं जुड़ पा रहे हैं। यदि जुलाई-अगस्त के बाद भी स्कूल खुलते हैं तो प्रयास रहेगा कि बच्चे पढ़ाई पूरी कर लें।दिग्विजय सिंह चौहान, अध्यक्ष (प्राथमिक शिक्षक संघ)

सरकारी स्कूलों में आम गरीब परिवारों के बच्चे ही ज्यादा आते हैं। कोरोनाकाल में लोगों के पास अनाज जुटाने का संकट है, ऐसे में महंगे स्मार्ट फोन के बारे में कोई कैसे सोच सकता है। स्कूल खुल जाएं तो रोटेशन में कक्षा शुरू की जा सकती है। कम छात्र होने से सोशल डिस्टेंसिंग भी कायम रहेगी।
विनोद थापा, अध्यक्ष (जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ)

हमारे स्कूल में भी ऑनलाइन पढ़ाई से बहुत कम छात्र जुड़े हैं। बामुश्किल दस फीसदी ही। ऐसे बच्चे तो पढ़ाई जारी रख रहे हैं मगर, 90 फीसदी पिछड़ रहे हैं। मेरा मानना है कि स्कूलों को थोड़े-थोड़े समय के लिए खोलना चाहिए। दिन के हिसाब से कक्षाओं का शेड्यूल तय हो जाना चाहिए।
कल्पना बिष्ट, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ) 

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