आफत की बारिश : मुनस्यारी में मलबे ने गोरी नदी का प्रवाह रोका

उत्तरप्रदेश

चिमड़ा थौड़ नाले के मलबे से गोरी नदी का प्रवाह रोक दिया है। नदी का प्रवाह रुकने से यहां दो किमी लंबी झील बन गई है। 15 मीटर ऊंची झील बनने से आसमानी आफत के बीच नीचे बसी आबादी की मुश्किल बढ़ गई है। नीचे बसे गांवों में आपदा का खतरा मंडरा गया है। बारिश के साथ ही झील का जनस्तर भी बेतहाशा बढ़ रहा है, जो खतरे की घंटी है। समय रहते नदी का प्रवाह शुरू नहीं हुआ तो झील बढ़ी त्रासदी की गवाह बन सकती है।

लुमती के पास चिमड़ा थौड़ नाला गोरी नदी में मिलता है। क्षेत्र में भारी बारिश से नाला अपने साथ कई टन मलबा बहा लाया और मलबा जमा होने से गोरी नदी का प्रवाह थम गया है। नदी का प्रवाह रुकने से इस स्थान पर दो किमी लंबी झील बन गई है। बारिश के साथ ही झील का दायरा और जलस्तर बढ़ने का सिलसिला जारी है, जो नीचे बसी आबादी के लिए बढ़ी मुसीबत का संकेत है। नीचे की तरफ नदी किनारे घुरुड़ी, मनकोट, बरम सहित 6से अधिक गांव बसे हैं। यहां की 5हजार की आबादी पहले ही आपदा की मार झेल रही है। नदी में झील बनने से इन लोगों की मुसीबत और बढ़ गई है। समय रहते नदी का प्रवाह शुरू होने के साथ ही झील का जलस्तर कम नहीं हुआ तो यह किसी बढ़ी त्रासदी का कारण बन सकता है। 

धुरुड़ी के खेतों तक पहुंचा झील का पानी

मुनस्यारी। आसमानी आफत के साथ ही झील का बढ़ता जलस्तर घुरुड़ी के लोगों के लिए मुसीबत खड़ी कर रहा है। झील का पानी नदी से 15मीटर ऊंचाई पर स्थित घुरुड़ी गांव के खेतों तक पहुंच चुका है। कई खेत झील में समा गए हैं। इसके बाद भी भूकटाव जारी है। बड़े-बड़े पेड़ों को झील ने अपने आगोश में ले लिया है, जिससे ग्रामीणों में दहशत है।

झील टूटी तो जौलजीबी के निचले इलाकों को खतरा

मुनस्यारी। गोरी नदी का प्रवाह रुक बढ़ी झील बनना जौलजीबी के लोगों को भी मुसीबत में डाल सकता है। झील के नीच जौलजीबी बढ़ी आबादी वाला क्षेत्र है। जौलजीबी के एक तरफ काली तो दूसरी तरफ गोरी नदी बहती है। पहले ही काली नदी अपने प्रचंड वेग में बह रही है। दूसरी तरफ झील  टूटने से गोरी नदी का सैलाब भी यहां के लोगों के लिए आपदा का कारण बन सकता है। 

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